जीवनसाथी की सबसे ल्यादा ज़रूरत जीवन-सोया के समय होती है। उम को ढलान का एकाकीपन जीवन का सबसे यतिन दौर होता है। ककेडाँकै नायक आनन्द सिन्हा एक विधुर हैं। पत्नी की मृत्यु के बाद वे जीवन में रीतापन अनुभव करते हैं जिसे दूर करना उन्हें अत्यंत प्रेम करने वाले परिवार के लिए भी संभव नहीं। प्रकृति के सानिध्य में मन की शांति तलाशने वे मनाली जाते हैं, लेकिन वहां कुछ ऐसा घटित हो जाता है जो उन्हें ए
Die Inhaltsangabe kann sich auf eine andere Ausgabe dieses Titels beziehen.