Bhartiya Rashtravad KI Bhumika - Hardcover

Shivdayal

 
9789358697063: Bhartiya Rashtravad KI Bhumika

Inhaltsangabe

भारतीय राष्ट्रवाद की भूमिका

'भारतीय राष्ट्रवाद की भूमिका' के चिंतनपरक, विचारोत्तेजक निबंध अपने अंदर ऐसे विषयों को समेटे हैं जो स्वयं भारतीय राष्ट्रवाद की भूमिका रचते हैं। इन निबंधों में गहन वैचारिकी का एक विस्तृत वर्णपट है। ये निबंध गहरी संवेदना और सरोकार के साथ लिखे गए हैं। इनमें लेखक का गहन अध्ययन और अन्वीक्षण और मीमांसा शक्ति परिलक्षित होती है। देश-दुनिया के संकटों पर लेखक दृष्टिपात ही नहीं करता बल्कि इनसे पार पाने का रास्ता भी सुझाता है।

भारतीय राष्ट्रवाद की पृष्ठभूमि और भूमिका पर विचार करते हुए लेखक इस नतीजे पर पहुंचता है कि अपने को एक और अक्षुण्ण रखकर ही भारत शेष विश्व को कुछ दे सकता है, और राष्ट्रवाद इसका एक व्यापक आधार प्रदान करता है। भारत के लिए राष्ट्रवाद का विचार कोई नया नहीं है, भारतीय राष्ट्र की यूरोपीय राष्ट्र राज्यों के साथ कोई तुलना नहीं हो सकती। यह कोई आत्मकेंद्रित अवधारणा नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक अभिव्यक्ति में भी यह मुक्तिकामी ही रहा है। इसकी सार्थकता सार्वभौमवाद को साकार करने में है 'राष्ट्र परिवार के आगे विश्व परिवार को संभव बनाने के लिए', अखिरकार हमारा विश्वबोध तो वसुधैव कुटुम्बकम में ही अभिव्यक्ति पाता है।

लेखक एवं चिंतक शिवदयाल ने भारतीय परंपरा व इतिहास बोध, राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और राजव्यवस्था, लोकजीवन और संस्कृति, विकास की मरीचिका और उससे उपजा विश्वव्यापी पारिस्थितिकीय संकट, आदि विषयों पर समग्रता से विचार किया है। भारतीय लोकतंत्र के संदर्भ में उन्होंने मूल्य के रूप में लोकतंत्र की महत्ता को प्रतिष्ठापित किया है।

समाजवादी क्रांति का सपना और यथार्थ, मिस्र की क्रांति अरब वसंत और बांग्लादेश की घटनाओं के विश्लेषण के साथ ही लेखक ने दुनिया की हलचलों और बदलती व्यवस्

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