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KHUD ME WAPAS EK MUKAMMAL SAFAR - Softcover

Rajnish Sharma

 
9789375437659: KHUD ME WAPAS EK MUKAMMAL SAFAR

Inhaltsangabe

"खुद से वापस" कभी रात के तीन बजे - किसी का नाम ढूँढा है फ़ोन में - और फिर रख दिया हो? कभी भीड़ में खड़े होकर - इतना अकेला महसूस किया हो - कि साँस लेना मुश्किल लगे? कभी आईने के सामने खड़े होकर - ख़ुद को पहचाना न हो? अगर हाँ - तो यह किताब - तुम्हारे लिए लिखी गई है। "खुद से वापस" - एक ऐसे इंसान का सफ़र है जो मोहब्बत में सब कुछ दे बैठा - और जब वो मोहब्बत चली गई - तो ख़ुद को भी खो बैठा। यह किताब उस टूटन की कहानी है। उस सुन्नपन की - जब आँसू भी सूख जाते हैं। उस अकेलेपन की - जो हर भरी महफ़िल में साथ बैठा रहता है। पर यह सिर्फ़ दर्द की किताब नहीं है। यह उठने की किताब है। माफ़ करने की - ख़ुद को। जाने देने की - उसे। और सबसे ज़रूरी - ख़ुद से वापस आने की।

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Über die Autorin bzw. den Autor

रजनीश शर्मा एक कवि, लेखक और कुशल डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। ये 20 सालों तक कॉर्पोरेट सेक्टर में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। अपनी चर्चित पुस्तक 'कालचक्र' के बाद, वे अब अपनी नई मर्मस्पर्शी कृति 'खुद में वापस' लेकर आए हैं। उनकी लेखनी में जीवन के यथार्थ, गहरी भावनाओं और दार्शनिक दृष्टिकोण का एक अद्भुत तालमेल मिलता है। कहानीकारी के प्रति उनका जुनून पाठकों को आत्म-मंथन करने और स्वयं से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है। सरल और प्रभावी भाषा के माध्यम से वे अपनी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं को खूबसूरती से जीवंत करते हैं।

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